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Wednesday, 28 February 2018
Thursday, 22 February 2018
इस गांव के लोगों ने 150 साल से नहीं मनाई होली, कारण जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान
रंगों के त्योहार होली का नाम जहन में आते ही लोगों के अंतर्मन में एक अलग सा उत्साह आ जाता है। लेकिन हरियाणा के कैय़ल के गुहला चीका स्थित गांव दुसेरपुर के लोग 150 सालों से इस त्योहार के आनंद से अनभिज्ञ हैं। गांव के लोगों द्वारा होली न मनाए जाने के पीछे का कारण बाबा द्वारा दिया गया श्राप है।
लोगों के अनुसार तकरीबन 150 साल पहले एक ठिगने कद के बाबा का मजाक होली के दिन कुछ लोगों द्वारा उठाया गया। जिससे नाराज बाबा ने होली दहन के मौके पर ही खुद को जिंदा दफन कर लिया। लेकिन मरने के पहले उन्होंने पूरे गांव को श्रापित कर दिया। श्राप के मुताबिक गांव में जो भी व्यक्ति होली का पर्व मनाएगा उसके परिवार का नाश हो जाएगा। जब गांव वालों ने बाबा की मान मुनव्वल की तो उन्होंने उससे मुक्त होने का तरीका बताया।
बाबा ने बताया कि जब गांव में होली के दिन गाय के बछड़े या महिला के लड़के का जन्म होगा उसके बाद गांव श्राप से मुक्त हो जाएगा और उसके बाद पूरा गांव होली मना सकेगा। लेकिन संयोगवश 150 साल बीत जाने के बाद भी गांव में किसी बछड़े का लड़के का जन्म होली के दिन न हो सका। इसके विपरीत जिस किसी ने भी श्राप की अनदेखी करते हुए होली मनाने का प्रयास किया उसे नुकसान का सामना करना पड़ा। जिसके चलते इतना समय व्यतीत होने के बाद भी लोग होली नहीं मना पा रहे।
Thursday, 15 February 2018
अध्यक्ष बनने के बाद से हुए कई बदलाव, चर्चा का विषय बने राहुल
राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने के बाद भले ही कांग्रेस हुए चुनावों में जीत हासिल न कर पाई हो लेकिन जो आंकड़े देखने को मिले वह वास्तविक तौर पर लोगों की नजरों में अस्तित्व खो रही कांग्रेस पार्टी के लिए चौकाने वाले हैं। राहुल गांधी के व्यक्तित्व में अचानक हो रहे बदलावों को लेकर उनकी छवि दिन प्रतिदिन निखरती जा रही है। कांग्रेस समर्थक हो या विरोधी लेकिन सभी राहुल गांधी की परिपक्व राजनीति को लेकर चर्चा कर रहे हैं। राहुल गांधी की कुछ ऐसी बाते जो उनके व्यक्तित्व में लगातार निखार ला रही है।
संयम और मर्यादित बयान
राहुल गांधी अध्यक्ष बनने के बाद से लगातार जिस तरह से संयम बनाए हुए हैं वह काबिल ए तारीफ है। गुजरात चुनावों के दौरान की ही बात की जाए तो राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर हमला तो बोला लेकिन वह हमेशा व्यक्तिगत प्रहार से गुरेज करते रहें।
आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी
अध्यक्ष पद संभालने के बाद से ही राहुल गांधी के आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। इसी के साथ ही वह कठोर निर्णय लेने वाले राजनेता के तौर पर भी लोगों के दिलों में अपनी पकड़ बनाते जा रहे हैं। लोगों के दिलों में पकड़ मजबूत करने के साथ ही राहुल ने प्रतिद्वन्दियों से लड़ने की क्षमता में बढ़ोत्तरी की है।
Sunday, 28 January 2018
संविधान में नहीं तो आखिर कहां से आया 'दलित' शब्द ???
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दलित शब्द के इस्तेमाल को लेकर खड़े किये गये सवालों के बाद एक बड़ा प्रश्न जो सामने आता है वह यह है कि आखिर यह शब्द इस्तेमाल में कहां से आया? आखिर किसने इस शब्द को पिछड़े तबके के साथ जोड़ा?
इस शब्द को लेकर जुटाई गयी जानकारी के बाद जो चीजें निकलकर सामने आईं उनके मुताबिक दलित शब्द का जिक्र पहले इस्तेमाल 1831 में मोल्सवर्थ डिक्शनरी में पाया गया। फिर भीमराव अंबेडकर ने इस शब्द का इस्तेमाल अपने भाषणों के दौरान शुरू किया। कुछ जानकारों का मत तो यह भी है कि स्वामी श्रद्धानंद ने भी इस शब्द का इस्तेमाल 1921 से 1926 के बीच किया।
संविधान में नहीं मिलता जिक्र
संविधान में दलित शब्द का कोई जिक्र न मिलने के बाद नेशनल एससी कमीशन ने सभी राज्यों को निर्देशित किया कि राज्य अपने आधिकारिक दस्तावेजों में इस शब्द का इस्तेमाल न करें।
इसके बाद हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दलित शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। बताते चले कि डॉ. मोहन लाल माहौर ने दलित शब्द पर आपत्ति जताते हुए जनहित याचिका दायर की थी। जिस याचिका में साफ तौर पर कहा गया था कि संविधान में दलित शब्द का कोई जिक्र ही नहीं मिलता है।
दलित पैंथर्स में मिलता है नाम का जिक्र
1972 में महाराष्ट्र में दलित पैंथर्स मुंबई नाम का एक सामाजिक राजनीतिक संगठन बनाया गया। इस संगठन ने ही आगे चलकर एक आंदोलन का रूप ले लिया। यहीं से दलित शब्द को महाराष्ट्र में सामाजिक स्वीकृति मिल गई। इसके बाद नार्थ इंडिया में दलित शोषित समाज संघर्ष समिति का गठन कांशीराम द्वारा किया गया। फिर महाराष्ट्र के बाद नार्थ इंडिया में भी पिछड़े और अति पिछड़ों को दलित कहा जाने लगा।
Wednesday, 24 January 2018
सरकार का रिपोर्ट कार्ड तैयार : काम कर रही है एण्टी रोमियो स्क्वायड, आप भी जान लीजिए यह आंकड़े
Lucknow. यूपी में 2017 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता में आई योगी सरकार ने अपनी वचनबद्धता निभाते हुए महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों पर नियंत्रण के लिए एण्टी रोमियो स्क्वायड के गठन का फैसला लिया। इस स्क्वायड के गठन की जहां चौतरफा सराहना की गयी वहीं इसके असली रंग में आते ही जनता त्राहिमाम करने लगी। आलम यह हुआ कि मनचले तो अपनी हरकतों को अंजाम देते रहे लेकिन घर से बहन भाई का साथ निकलना भी दूभर हो गया।
किसी को थाने में आधार कार्ड दिखाकर पुलिस के हाथ पैर जोड़ने पड़े, तो कुछ के अभिभावकों को थाने पहुंच भाई बहन होने के रिश्ते का प्रमाण देना पड़ा। चौकी से कुछ दूरी पर विद्यालय के भीतर घुसकर मनचलों ने छात्राओं को छेड़खानी का शिकार बनाया तो विरोध करने पर विद्यालय के चौकीदार को भी पीटा। फिलहाल इन सब चीजों से इतर सरकार अपने 9 माह पूरे होने पर इस स्क्वायड के आंकड़े जारी कर महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों पर काफी हद तक शिकंजा कसे होने का दावा करने को तैयार है। यह दावे इसलिए भी चौकाने वाले हैं क्योकि यह ठीक उसी समय जारी हो रहे हैं जब यूपी के बाराबंकी की रहने वाली एक बेटी खुद ही पीएम मोदी और सीएम योगी को खून से पत्र लिख मदद की गुहार लगा रही है। जबकि इससे पहले बलिया में रागिनी और कई अन्य लड़कियों के साथ हुई वारदातें भी कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा कर चुकी है।
फिलहाल सरकार जिन आंकड़ों को सामने लाकर अपनी उपलब्धि गिनाना चाहती है अगर उन पर नजर डाली जाए तो उसके अनुसार रोजाना मनचलों के खिलाफ तकरीबन 6 केस दर्ज किये गये हैं। द इण्डियन एक्सप्रेस अखबार में छपी खबर के मुताबिक 9 माह की अवधि में तकरीबन 3003 लोगों को शिकंजा कसने का काम किया गया है। जिसकी लिस्ट सरकार गणतंत्र दिवस के मौके पर जारी करेगी। गौरतलब है कि सरकार के मुख्य सचिव राजीव कुमार द्वारा सोमवार को सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिख एण्टी रोमियो स्क्वायड की उपलब्धि बताई गयी है। इसके अनुसार 22 मार्च से 15 दिसंबर तक 9 लाख से भी अधिक लोगों को चेतावनी दी गयी है। जबकि 21 लाख लोगों की जांच की गयी है और 1706 लोगों को खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी है।
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