Lucknow. यूपी में 2017 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता में आई योगी सरकार ने अपनी वचनबद्धता निभाते हुए महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों पर नियंत्रण के लिए एण्टी रोमियो स्क्वायड के गठन का फैसला लिया। इस स्क्वायड के गठन की जहां चौतरफा सराहना की गयी वहीं इसके असली रंग में आते ही जनता त्राहिमाम करने लगी। आलम यह हुआ कि मनचले तो अपनी हरकतों को अंजाम देते रहे लेकिन घर से बहन भाई का साथ निकलना भी दूभर हो गया।
किसी को थाने में आधार कार्ड दिखाकर पुलिस के हाथ पैर जोड़ने पड़े, तो कुछ के अभिभावकों को थाने पहुंच भाई बहन होने के रिश्ते का प्रमाण देना पड़ा। चौकी से कुछ दूरी पर विद्यालय के भीतर घुसकर मनचलों ने छात्राओं को छेड़खानी का शिकार बनाया तो विरोध करने पर विद्यालय के चौकीदार को भी पीटा। फिलहाल इन सब चीजों से इतर सरकार अपने 9 माह पूरे होने पर इस स्क्वायड के आंकड़े जारी कर महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों पर काफी हद तक शिकंजा कसे होने का दावा करने को तैयार है। यह दावे इसलिए भी चौकाने वाले हैं क्योकि यह ठीक उसी समय जारी हो रहे हैं जब यूपी के बाराबंकी की रहने वाली एक बेटी खुद ही पीएम मोदी और सीएम योगी को खून से पत्र लिख मदद की गुहार लगा रही है। जबकि इससे पहले बलिया में रागिनी और कई अन्य लड़कियों के साथ हुई वारदातें भी कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा कर चुकी है।
फिलहाल सरकार जिन आंकड़ों को सामने लाकर अपनी उपलब्धि गिनाना चाहती है अगर उन पर नजर डाली जाए तो उसके अनुसार रोजाना मनचलों के खिलाफ तकरीबन 6 केस दर्ज किये गये हैं। द इण्डियन एक्सप्रेस अखबार में छपी खबर के मुताबिक 9 माह की अवधि में तकरीबन 3003 लोगों को शिकंजा कसने का काम किया गया है। जिसकी लिस्ट सरकार गणतंत्र दिवस के मौके पर जारी करेगी। गौरतलब है कि सरकार के मुख्य सचिव राजीव कुमार द्वारा सोमवार को सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिख एण्टी रोमियो स्क्वायड की उपलब्धि बताई गयी है। इसके अनुसार 22 मार्च से 15 दिसंबर तक 9 लाख से भी अधिक लोगों को चेतावनी दी गयी है। जबकि 21 लाख लोगों की जांच की गयी है और 1706 लोगों को खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी है।

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