Sunday, 28 January 2018

संविधान में नहीं तो आखिर कहां से आया 'दलित' शब्द ???


मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दलित शब्द के इस्तेमाल को लेकर खड़े किये गये सवालों के बाद एक बड़ा प्रश्न जो सामने आता है वह यह है कि आखिर यह शब्द इस्तेमाल में कहां से आया? आखिर किसने इस शब्द को पिछड़े तबके के साथ जोड़ा?
इस शब्द को लेकर जुटाई गयी जानकारी के बाद जो चीजें निकलकर सामने आईं उनके मुताबिक दलित शब्द का जिक्र पहले इस्तेमाल 1831 में मोल्सवर्थ डिक्शनरी में पाया गया। फिर भीमराव अंबेडकर ने इस शब्द का इस्तेमाल अपने भाषणों के दौरान शुरू किया। कुछ जानकारों का मत तो यह भी है कि स्वामी श्रद्धानंद ने भी इस शब्द का इस्तेमाल 1921 से 1926 के बीच किया। 

संविधान में नहीं मिलता जिक्र 

संविधान में दलित शब्द का कोई जिक्र न मिलने के बाद नेशनल एससी कमीशन ने सभी राज्यों को निर्देशित किया कि राज्य अपने आधिकारिक दस्तावेजों में इस शब्द का इस्तेमाल न करें।
इसके बाद हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दलित शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। बताते चले कि डॉ. मोहन लाल माहौर ने दलित शब्द पर आपत्ति जताते हुए जनहित याचिका दायर की थी। जिस याचिका में साफ तौर पर कहा गया था कि संविधान में दलित शब्द का कोई जिक्र ही नहीं मिलता है। 

दलित पैंथर्स में मिलता है नाम का जिक्र

1972 में महाराष्ट्र में दलित पैंथर्स मुंबई नाम का एक सामाजिक राजनीतिक संगठन बनाया गया। इस संगठन ने ही आगे चलकर एक आंदोलन का रूप ले लिया। यहीं से दलित शब्द को महाराष्ट्र में सामाजिक स्वीकृति मिल गई। इसके बाद नार्थ इंडिया में दलित शोषित समाज संघर्ष समिति का गठन कांशीराम द्वारा किया गया। फिर महाराष्ट्र के बाद नार्थ इंडिया में भी पिछड़े और अति पिछड़ों को दलित कहा जाने लगा। 

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