Friday, 19 January 2018

... बोले कांशीराम मैं तुम्हें ऐसा नेता बना सकता हूं जिसके पीछे कलेक्टरों की लाइन लगी रहेगी


Lucknow. दलित समाज के लिए एक बड़े नेता के तौर पर जाने जानी वाली बसपा सुप्रीमो मायावती शुरुआत से ही नेता बनने का सपना लेकर बड़ी नहीं हुई थीं। 1977 की सर्द रात में ग्यारह बजे मायावती ने खाना खाने के बाद पढ़ना शुरू ही किया कि उनके घर के दरवाजे पर आहट हुई। दरवाजा खोलने पहुंचे मायावती के पिता प्रभुदयाल ने देखा कि बाहर गले में मफलर डाले लगभग आधा गंजा हो चुका एक अधेड़ उम्र का शख्स खड़ा हुआ है। उस शख्स द्वारा परिचय दिये जाने पर प्रभुदयाल को पता चला कि वह बामसेफ के अध्यक्ष कांशीराम हैं। जो मायावती को एक भाषण के लिए आमंत्रित करने आए हुए हैं।

कांशीराम की जीवनी द लीडर आफ दलित्स में लिखी बातों के अनुसार कांशीराम ने मायावती से पहला सवाल किया कि वह क्या करना चाहती हैं। जिसके बाद मायावती का जवाब था कि वह आईएएस बन दलित समाज की सेवा करना चाहती है। उस समय मायावती का आईएएस बनने का ख्वाब देखने के कारण कोई निजी स्वार्थ नहीं बल्कि एक मात्र विचार दलितों की सेवा का था।

जिसकें बाद कांशीराम ने सवाल किया कि तुम आईएएस बन कर क्या करोगी? मैं तुम्हें एक ऐसा नेता बना सकता हूं जिसके पीछे एक नहीं बल्कि सैकड़ों कलेक्टरों की लाइन लगी रहेगी। उस समय तुम दलितों के लिए ज्यादा काम कर सकोगी। कांशीराम ने मायावती के सामने अपना विचार रखते हुए पिता प्रभुदयाल से उन्हें संगठन में काम करने की अनुमति प्रदान करने की बात कही। हालांकि पिता प्रभुदयाल के बात को टालने के बावजूद मायावती ने अपना असली उद्देश्य समय निर्णय लिया और आज वह इतनी बड़ी दलित नेता बन कर सभी के सामने हैं।  

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