महिलाओं पर हो
रही दहेज उत्पीड़न की घटनाओं पर सरकार किस करवट बैठे जिससे सभी के साथ इंसाफ हो
सके। इस कानून को यदि मजबूती दी जाती है तो इसका दुरप्रयोग होता है। अगर इसमें
कटौती की जाती है तो महिलाएं इसकी बलि चढ़ती है और छूट का दुरप्रयोग होता है। गत
दिनों सुप्रीम कोर्ट की ओऱ से इस मामले में अहम निर्देश जारी किये गये जिसके बाद 498-ए में कई बदलाव देखने को मिले। इन बदलावों के
बाद साफ तौर पर महिला समाज के साथ नाइंसाफी होती दिखाई दे रही है।
सुप्रीम कोर्ट के
निर्देश के बाद अब पति और ससुराल उत्पीड़न की शिकायत के बाद त्वरित गिरफ्तारी नहीं
हो सकेगी। गिरफ्तारी से पहले इस बात की जांच होगी की शिकायत सही है या नहीं उसके
बाद कोई कार्रवाई हो सकेगी। पड़ताल पुलिस नहीं बल्कि अन्य समिति के द्वारा की
जाएगी। कोर्ट के मुताबिक जांच की इस नई समिति का नाम परिवार कल्याण समिति होगा।
इसकी रिपोर्ट के बिना पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करेगी। हालांकि जांच कमेटी की
रिपोर्ट को मानना जांच अधिकारी या मजिस्ट्रेट को मानना जरूरी नहीं होगा। कोर्ट की
ओर से यह नए निर्देश 27 जुलाई 2017 को जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस उदय
उमेश ललित की बेंच ने दिया है।
कोर्ट का साफ तौर
पर कहना है कि महिलाएं इस कानून का गलत इस्तेमाल कर रही है। जिसके चलते झूठे केस
सामने आ रहे है। झूठे केसों के चलते ससुराल वालों को बिना अपराध के ही गिरफ्तारी
और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
इस मामले का एक
पहलू यह भी है कि कानून में कड़ाई कम होने के बाद महिलाओं के साथ होने वाले दहेज
उत्पीड़न के अपराधों में वृद्धि होगी। जाहिर तौर पर भले ही गत दिनों में कुछ
महिलाओं के द्वारा इसका दुरप्रयोग किया जा रहा हो लेकिन यह भी सच है कि उत्पीड़न
होता है।

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