Sunday, 22 April 2018

...तो क्या गठबंधन के बाद एक साथ आए सपा-बसपा, IIT के छात्रों के इस कदम के बाद खो देंगे अपना अस्तित्व!



Lucknow. पथभ्रमित हो चुकी देश की राजनीति को वापस मार्ग पर लाने के लिए आईआईटी के 50 छात्रों ने एक नया बेड़ा उठाया है। इन सभी छात्रों ने अपनी अपनी नौकरी छोड़कर एक नये राजनीतिक दल का गठन किया है। बहुजन आजाद पार्टी(BAP) नाम से गठित इस पार्टी का मुख्य कार्य अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वार्ग को उनके अधिकार दिलाना है। वहीं इस पार्टी के अस्तित्व में आने के बाद राजनेताओं का मानना है इससे सबसे ज्यादा नुकसान सपा और बसपा को होगा। 


हालांकि बहुजन आजाद पार्टी(बीएपी) को अभी चुनाव आयोग से मंजूरी नहीं मिली है। वहीं इस बारे में ग्रुप के नेतृत्वकर्ता नवीन कुमार द्वारा पीटीआई को बताया गया कि हमारे ग्रुप के सभी 50 साथी अलग अलग आईटीआई से हैं। जिनका राजनीति को सही आयाम की ओर ले जाना है। वह जल्दबाजी कर चुनावी मैदान में नहीं कूदना चाहते हैं। न ही वह 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। नवीन का कहना है कि हम बड़ी इच्छाओं वाली छोटी पार्टी बनकर नहीं रहना चाहते हैं। इसके लिए 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव से शुरुआत करेंगे और अगले लोकसभा चुनाव का लक्ष्य रखेंगे। इसी के साथ नवीन ने बताया कि इस ग्रुप में मुख्यतः एससी, एसटी, और ओबीसी तबके के लोग शामिल हुए हैं। 


Thursday, 5 April 2018

#BlackBuckPoachingCase : सलमान की शिकायत करने वाले बिश्नोई समाज के लिए खास क्यों है काला हिरण


Lucknow. बॉलीवुड के सुपर स्टार सलमान खान को तकरीबन 20 सालों बाद जोधपुर की अदालत से दोषी करार दे दिया गया है। हालांकि इस मामले में कोर्ट ने अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। इस मामले में सलमान के साथ सैफ अली खान, सोनाली बेन्द्रे, तब्बू और नीलम को बरी कर दिया है। इस मामले में सलमान खान की शिकायत बिश्नोई समाज की ओर से की गयी थी। जिसके बाद उन्होंने 20 सालों तक इंसाफ की लड़ाई लड़ी। 
आपको बताते चलें कि बिश्नोई समाज की ओर से अक्टूबर 1998 में शिकायत दर्ज करवाने के बाद पुलिस और वन विभाग के अधिकारी हरकत में आए थे। समुदाय के लोगों का कहना था कि सलमान सहित बाकी सितारों ने हम साथ साथ हैं फिल्म की शूटिंग के दौरान भागोदा की धानी के पास दो काले हिरणों का शिकार किया था। शिकायतकर्ता के अनुसार जब लोगों को इस बारे में पता चला तो सभी सितारे जानवरों को छोड़कर फरार हो गये। 


क्यों बिश्नोई समाज ने की मामले की शिकायत


बिश्नोई समाज इकलौता ऐसा समाज है जिसका एकमात्र उद्देश्य प्रकृति की रक्षा करना होता है। तकरीबन 500 साल पुराने इस धर्म में 10 लाख से ज्यादा अनुयायी हैं। इसकी स्थापना भगवान जंबेश्वर ने की थी जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। 

कहा जाता है कि जंबेश्वर ने सात साल की उम्र तक एक भी शब्द नहीं बोला। जिसके बाद उनके पिता जी ने अजीबो गरीब व्यवहार को देख पंडित बुलवाया। उस दौरान पुजारी ने 64 दिये जलाने का उपाय बताया। काफी प्रयासों के बावजूद जब दिये नहीं जले तो जंबेश्वर ने कुए के पानी से दिये जलाए। 

काला हिरण ही क्यों अहम 


विश्नोई समाज के लोग प्रकृति से जुड़ी सभी चीजों को पवित्र मानते हैं। इसलिए वह गांव में मौजूद पेड़-पौधे, जंगली जीव, काला हिरण, चिंकारा, पक्षी सभी की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। इन सभी की रक्षा के लिए विश्नोई समाज के लोग कोई भी सीमा पार करने को तैयार रहते हैं। 


जानवरों की रक्षा के लिए जान तक गवां देते हैं बिश्नोई


बिश्नोई शिकारियों का मुकाबला लाठियों से करते हैं। वह हमेशा शिकारी को पकड़ फॉरेस्ट अथॉरिटी को दे देते हैं। आंकड़ो के अनुसार 20 सालों में तकरीबन 14 बिश्नोई जनवरों की रक्षा करते हुए जान गवां चुके हैं। आप बिश्नोई समाज की महिलाओं द्वारा चिंकारा और काले हिरणों को अपना दूध पिलाते भी देख सकते हैं। 

Sunday, 1 April 2018

आसार पर खरी उतरी कांग्रेस तो BJP के लिए होगी मुश्किल


Lucknow. कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए 17 अप्रैल को नामांकन और 12 मई को मतदान होना है। नामांकन और मतदान से पूर्व ही सामने आ रहे प्री पोल कहीं न कहीं यह इशारा कर रहे हैं कि एक बार फिर कांग्रेस अपना किला बचाने में कामयाब हो सकती है। सी फोर एजेंसी के सर्वे के अनुसार विधानसभा की कुल 224 सीटो में कांग्रेस को 109-120 सीटें मिलने की उम्मीद है। जबकि बीजेपी को 40 से 60 सीटें मिलती हुई दिख रही है।
सामने आए प्री पोल सर्वे के मुताबिक कांग्रेस बहुमत के आंकड़े 113 के आस पास ही दिख रही है। जिसके चलते चुनाव से पहले ही समर्थकों में खासा उत्साह है। अगर कर्नाटक चुनावों में कांग्रेस पार्टी जीत दर्ज करने में सफल होती है तो इससे कहीं न कहीं पार्टी को चौतरफा फायदे होने के आसार हैं। राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद कर्नाटक ही वह पहला राज्य होगा जहां उनके नेतृत्व में कांग्रेस परचम फहराने में सफल होगी। जाहिर तौर पर इससे पार्टी का मनोबल और राजनीति में राहुल का कद बढ़ेगा।
आपको बताते चलें कि इसी साल के अंत तक मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी चुनाव होने हैं। अगर पार्टी कर्नाटक में जीत दर्ज कर लेती है तो वह अन्य राज्यों में भी प्रचार के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने की स्थिति में आ जाएगी। इन चुनावों में जीत के साथ कहीं न कहीं पार्टी यह संदेश देने में भी सफल हो जाएगी कि वह मोदी और शाह के विजय अभियान को रोकने में सक्षम हो गयी है।

अगर जीत जाती है बीजेपी तो क्या होगा बदलाव 

भले ही प्री पोल कांग्रेस के पक्ष में जाते हुए दिख रहे हों। लेकिन चुनाव से पहले बनने और बिगड़ने वाले समीकरणों का सही मायनों में मूल्यांकन तो मतगणना के दौरान ही होता है। फिलहाल अगर कर्नाटक चुनावों में भारतीय जनता पार्टी जीत जाती है तो कहीं न कहीं उपचुनावों में मिली हार का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। हालांकि उपचुनावों में मिली हार का बदला तो पहले ही राज्यसभा चुनाव के परिणाम दे चुके हैं। फिर अगर कर्नाटक विजय होती है तो भाजपा यह साबित करने में सफल हो जाएगी कि विपक्षी दलों की एकजुटता के इतर उसका पलड़ा भारी है। 

Thursday, 29 March 2018

सपा बसपा की डूबती नैया को दिखा सहारा, अगर सफल हुआ यह फॉर्मूला तो बीजेपी की होगी बड़ी हार!


2019 के लोकसभा चुनाव भले ही अभी दूर हों, लेकिन चुनाव को लेकर खेमेबंदी शुरू हो गयी है। इसी खेमेबंदी के तहत बसपा सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को अहसास हो चुका है कि बीजेपी को सत्ता से बेदखल करना तो नए वजूद को तलाशना होगा। इसी नई तलाश में जो फॉर्मूला इजात किया गया है उसके मुताबिक अगर साइकिल, हाथी और शंख एक हो जाए तो कोई सामने नहीं टिक सकेगा।


यहां साइकिल और हाथी से मतलब समाजवादी पार्टी एवं बहुजन समाज पार्टी है। जो कि पहले से ही एक हो चुके हैं। इसके बाद अगला कदम शंख की ओर है। शंख का मतलब ब्राह्मणों से है। चूंकि दोनों ही दलों के नेता समझ चुकें हैं कि यदि यादव, दलित और ब्राह्मण एक साथ आ जाए तो सत्ता प्राप्त करने में कोई कठिनाई नहीं होगी।
समाजवादी खेमे का मानना है कि ब्राह्मण समुदाय बीजेपी से कहीं न कहीं नाराज चल रहा है। जिसका कारण प्रचण्ड बहुमत के बाद भी बीजेपी के ओर से बनाए गये मुख्यमंत्री का ब्राह्मण न होना है। जिसके बाद समाजवादी खेमे को लग रहा है कि बीजेपी के सवर्ण वोटबैंक में सेंध लगानी है तो ब्राह्मणों की नाराजगी का लाभ उठाते हुए उन्हें अपनी ओर मिलाया जा सकता है।


क्या कहते हैं आंकड़े
बताते चलें कि यूपी में इस समय विधानसभा के कुल 400 सदस्यों में 67 ब्राह्मण विधायक हैं। इनमें से 58 विधायक बीजेपी के पास है। जाहिर तौर पर अगर कोई भी खेमा ब्राह्मणों को लुभाने में सफल रहता है तो उसका सीधा प्रभाव बीजेपी पर ही पड़ेगा। 

Tuesday, 27 March 2018

खाप पंचायतों को सुप्रीम कोर्ट का आदेश, कहा - प्यार पर पहरा बर्दाश्त नहीं


Lucknow. लगातार सुनाए जा रहे तालिबानी फरमानों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अख्तियार करते हुए खाप पंचायतों को फटकार लगाई है। मंगलवार को कोर्ट ने दो बालिगों की रजामंदी के बाद हो रही शादी में खाप पंचायतों का किसी भी प्रकार के दखल को पूरी तरह से अवैध करार दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर औऱ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने खाप पंचायतों को निर्देश जारी करते हुए कपल्स की सुरक्षा को लेकर गाइडलाइन्स जारी की। इसी के साथ कोर्ट में यह भी साफ कर दिया कि यह गाइडलाइन्स तब तक जारी रहेंगी जब तक इस पर कोई कानून न बन जाए।



आपको बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट में शक्ति वाहिनी नाम की एऩजीओ ने खाप पंचायतों के खिलाफ याचिका दायर की थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से केन्द्र औऱ राज्य सरकारों को ऑनर किलिंग के मामलों पर रोक लगाने के लिए दिशा निर्देश जारी किये गये है। कोर्ट ने इससे पहले भी सुनवाई के दौरान कहा था कि अगर दो बालिग शादी करने का फैसला करते हैं तो उसमें कोई भी दखल नहीं दे सकता है। कोई समाज, कोई पंचायत, या कोई व्यक्ति उन की शादी पर सवाल नहीं उठा सकता है।



Wednesday, 21 March 2018

खत्म नहीं हो रही बीजेपी की मुश्किले, मोदी मैजिक को बरकरार दिखाने के लिए जरूरी है यह जीत


यूपी उपचुनाव में हुई हार और राज्यसभा चुनाव से पहले सहयोगी दलों द्वारा खड़ी की जा रही समस्याओं से इतर बीजेपी के लिए एक और चुनौती बेसब्री से इंतजार कर रही है। यह चुनौती उन पांच लोकसभा की सीटों से संबंधित है जहां हाल ही में उपचुनाव होने हैं। 

गौरतलब है कि लोकसभा में बीजेपी के सदस्यों की संख्या में लगातार कमी हो रही है। 2014 के चुनाव के बाद बीजेपी के पास लोकसभा में 282 सदस्य थे। लेकिन फिलहाल सदस्यों की संख्या महज 274 पर सिमटकर रह गयी है। बताते चलें कि यह संख्या मैजिक फीगर में महज 2 ही ज्यादा है। फिर यदि पांच सीटों पर होने वाले उपचुनाव में गणित बिगड़ता है तो बीजेपी बहुमत के लिए सहयोगी दलों पर निर्भर हो जाएगी। 

जिन पांच सीटों पर यह उपचुनाव होना है उसमें यूपी की कैराना लोकसभा सीट, महाराष्ट्र की पालघर और भंडारा गोदिया, जम्मू कश्मीर की अनंतनाग, नागालैंड की सीट शामिल है। यूपी की दो सीटों पर हुए उपचुनाव के बाद जहां एक ओर कैराना सीट को लेकर संशय बरकरार है। वहीं महाराष्ट्र की दो सीटें भी भाजपा के लिए अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। एक ओर जहां कांग्रेस लगातार शरद पवार के साथ गठबंधन के प्रयासों में लगी हुई है। वहीं दूसरी ओर शिवसेना भी भाजपा विरोधी स्वर प्रखर किये हुए है। इसी के साथ जम्मू कश्मीर की सीट महबूबा मुफ्ती के मुख्यमंत्री बनने और नागालैंड की सीट नेफ्यू रियो के मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई थी। 

सीटों पर जीत के साथ ही भाजपा के सामने बड़ी चुनौती यह भी है कि वह विपक्षी दलों के सामने मोदी मैजिक को कम होता हुआ नहीं दिखाना चाहते है। जबकि विपक्ष किसी भी तरह इन सीटों  पर जीत हासिल कर जनता को यह संदेश देने का प्रयास करेगा कि देशभर में बीजेपी विरोधी लहर दौड़ रही है। इसी के साथ इन सीटों पर विपक्ष की जीत के साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी गहरा असर पड़ेगा। 

Sunday, 4 March 2018

अमित शाह के तंज पर कांग्रेस नेता का पलटवार, राहुल गांधी से...


Lucknow. कांग्रेस को पूर्वोत्तर में मिली करारी हार के बाद विपक्षी दलों की ओर से राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर जमकर आलोचना की जा रही हैं। मतगणना के दिन भी अनुपस्थित रहने पर बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने राहुल गांधी पर जमकर चुटकी ली। 


चुनावी परिणामों के सामने आने के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस अध्यक्ष पर चुटकी लेते हुए कहा कि, मुझे नहीं पता, वो एक व्हाट्सऐप पर मैसेज आया है कि इटली में चुनाव है. बताते चलें कि अमित शाह से पहले बीजेपी नेता गिरिराज सिंह औऱ मीनाक्षी लेखी भी राहुल गांधी पर जमकर तंज कस चुकी हैं। जिसके बाद कांग्रेसी नेता कमलनाथ ने तंज का जवाब देते हुए कहा कि राहुल गांधी की वजह से बीजेपी नर्वस है। बाकि राहुल लगातार हमारे संपर्क में हैं। इसके साथ ही कमलनाथ ने कहा कि राहुल गांधी 3 दिनों के लिए अपनी नानी से मिलने गये हैं। जो कि 93 वर्षीय हैं। 

बीजेपी नेताओं की ओर से ली जा रही चुटकी पर नाराजगी जताते हुए कमलनाथ ने कहा कि आज के जमाने में उन्हें(राहुल गांधी) को हर जगह उपस्थित रहने की आवश्यकता नहीं है। 

गुलजार हुई विवेक के घर की गलियां, आखिर एक दिन पहले कहां थे सभी?

राजधानी में शुक्रवार देर रात एप्पल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी गयी। देर रात तकरीबन 1.30 बजे घटित हुई इस घ...