राजधानी में शुक्रवार देर रात एप्पल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी गयी। देर रात तकरीबन 1.30 बजे घटित हुई इस घटना के बाद कथिततौर पर पुलिस प्रशासन की ओर से भर्सक प्रयास किया गया कि किसी भी तरह से इस घटना को दबाया जा सके। इसके लिए प्रयास तो यहां तक हुआ कि घटना की एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी विवेक की महिला मित्र सना को घर में नजरबंद रखा गया। हालांकि पुलिस के इन सभी कृत्यों की गूंज बाद में दोपहर तकरीबन 12.45 पर एसएसपी कार्यालय में हुई प्रेसवार्ता के दौरान सुनाई दी। इस गूंज का आलम यह रहा कि तीन माह पूर्व राजधानी की कमान संभालने आए एसएसपी कलानिधि नैथानी को पीसी बीच में छोड़कर जाना पड़ा। वहीं इस मामले में पुलिस की जमकर भद्द उस दौरान पिटी जब शाम को आरोपी प्रशान्त कुमार अपने साथियों के साथ मामले में अपनी एफआईआर दर्ज करवाने पहुंचा। जिसके बाद इस घटना ने एकाएक लखनऊ पुलिस प्रशासन और अधिकारियों के झूठे दावों पर सवाल खड़े कर दिये। इस दौरान पुलिस के जवानों ने ही उनकी कार्यप्रणाली की पोल खोली और कहा कि, "कप्तान साहब फोन नहीं उठा रहे और धमका रहे हैं। इसी के साथ आरोप तो यह भी लगा कि सीएम के दबाव में मामला नहीं दर्ज किया जा रहा।"
मामले में गौर करने वाली बात यह थी कि देर रात तकरीबन 1.30 बजे घटित हुई इस घटना के बाद शनिवार औऱ रविवार को पुलिस का कोई भी प्रदेश स्तरीय अधिकारी और न ही मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ही पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। इस दौरान सिर्फ प्रदेश सरकार के दो मंत्री ही मौके पर पहुंचे। वहीं रविवार को जैसे ही मृतक विवेक का अंतिम संस्कार हुआ वैसे ही विवेक के घर के बाहर तो जैसे नामचीन लोगों और जिम्मेदारों का जमावड़ा लग गया।
